"रैगिंग" के नाम पर "मेडिकल" कॉलेज में "जूनियर छात्रों" की "बेल्टों" से "पिटाई"

                                          हरीश शुक्ल                                          

👉 रात 09 बजे के बाद सीनियर छात्र जूनियरों की रैगिंग कर करते रहे पिटाई!

👉 25 बैच के नए नवेलों को 24 बैच के सीनियर छात्रों ने पीटा!

👉 आजिज छात्रों ने शासन से की शिकायत तो मचा हड़कंप!

👉 आनन-फानन परिसर में लगाए गए एंटी रैगिंग के साइनेज व बोर्ड!

👉 रैगिंग करने वालों पर नहीं की गई कोई कार्रवाई!

👉 जांच के नाम पर टीम गठित कर पूरी हो गई कागजी खानापूरी!

👉 प्राचार्य बोले छात्रों को बुलाकर पूंछा नहीं की किसी ने शिकायत!

👉 हॉस्टल में पिटते रहे बच्चे और चैन की नींद सोती रही एंटी रैगिंग टीम!

👉 किससे करें न्याय की आस जब जिम्मेदार शिकायतकर्ता छात्रों को ही दे रही घुड़की।

   ✍🏿 माननीय सुप्रीम कोर्ट लाख बंदिसें लगा दे लेकिन मनमानी करने वाले बाज नहीं आते। अमर शहीद जोधा सिंह अटैया ठाकुर दरियाव सिंह चिकित्सा महाविद्यालय फतेहपुर में रात के अंधेरे में रैगिंग के नाम पर एमबीबीएस के जूनियर छात्रों को सीनियर छात्रों द्वारा पीटा गया।इतना ही नहीं बंद कमरे में उनकी बेल्ट से पिटाई की गई। जब रोक नहीं लगी तो मजबूरन छात्रों ने शासन से गुपचुप शिकायत दर्ज करा दी। शासन द्वारा रैगिंग करने वालों पर कार्रवाई के आदेश के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया।रैंगिंग की घटना के बाद अब पूरे परिसर में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के साइनेज व बोर्ड लगवाए गए हैं। बच्चों से उत्पीड़न पर एंटी रैगिंग कमेटी से शिकायत करने की बात कही जा रही है जबकि बच्चे जब सीनियरों के हाथों पीटे जा रहे थे तो एंटी रैगिंग कमेटी से जुड़े लोग चैन की नींद सो रहे थे।


‌‌ फतेहपुर जिले में वर्ष-2021 में संचालित हुए मेडिकल कॉलेज का प्रथम बैच 100एमबीबीएस बच्चों का आया और इसके बाद लगातार वर्ष-2022,वर्ष-2023,वर्ष-2024 एवं वर्ष-2025 में 100-100 बच्चों के मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रवेश दिए गए। सारी व्यवस्थाएं,संसाधन मुहैया कराने के बाद इस बात के साफ दिशा निर्देश रहे कि आने वाले बच्चों के साथ सीनियरों द्वारा रैगिंग भी न की जाए। 04 साल का समय तो ठीक-ठाक निकल गया लेकिन वर्ष-2025 बैच के बच्चों के साथ वर्ष-2024 के छात्रों के द्वारा रात 09 बजे के बाद हास्टल के कमरे खुलवा कर उनके साथ रैगिंग की घटनाएं घटनी शुरू कर दी गईं।उन्हें पीटा जाने लगा।इतना ही नहीं जब उनकी पिटाई शुरू हो गई और बेल्ट की पिटाई तक सख्ती के साथ पहुंच गई तो उनका धैर्य,धीरज टूट गया। कॉलेज प्रशासन स्तर पर कोई भी राहत न मिलने के बाद शासन स्तर पर बच्चों ने शिकायत कर दी कि वर्ष 2024 के सीनियर छात्र उन्हें पीटते हैं और बेल्ट ट्रीटमेंट देते हैं।प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं महानिदेशक से हुई शिकायत के परिपेक्ष्य में आए पत्र ने कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मचा दिया।


  खबर है कि रैगिंग करने वाले छात्रों के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई करने के बजाय शिकायत करने वाले छात्रों को ही घुड़की दे धमकाया गया। आनन-फानन परिसर में एंटी रैगिंग के साइनेज,बैनर एवं होर्डिंग लगा दी गईं जिनमें मा.सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। जिस तरह से मेडिकल कॉलेज प्रशासन की उदासीनता एवं निष्क्रियता के चलते बच्चे पिटते रहे और एंटी रैगिंग कमेटी नींद में रही उससे व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं हलांकि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर आर.के.मौर्य ने कहा कि उन्होंने जांच के लिए कमेटी बनाई है।बच्चों को भी बुलाया था लेकिन किसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है।अब सवाल यह उठता है कि जब बच्चों ने अपनी शिकायत में गोपनीयता रख कार्रवाई करने की बात पहले ही कह दी थी तो फिर दोनों बैचों के बच्चों को बुलाने का औचित्य क्या था? *दहशतजदा बच्चे न्याय की आस किससे लगाएं जब जिम्मेदारों ने रैगिंग करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई या मुकदमा दर्ज कराने के बजाय शिकायत करने वाले पीड़ित छात्रों को ही धमकी दे दी।



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