वैश्विक शांति के बिना वास्तविक ईद की कल्पना बेमानी---शहर इमाम करामत उल्लाह

                                     अजय कुमार गुप्ता                                    

हमीरपुर। रमजान उल मुबारक का पवित्र महीना गुज़र गया लेकिन जाते जाते हम सब को एक महत्वपूर्ण सबक दे कर गया है। कि जिस तरह से हम लोग रमजान उल मुबारक के पवित्र महीने में गुनाहों(पापों) से बचते थे। उसी प्रकार हमारी पूरी जिंदगी गुनाहों से बचते हुए अल्लाह के आदेशों और अल्लाह के रसूल हजरत मुहम्मद स. के बताए हुए तरीके पर चलने वाली बन जाए। जिस तरह हमने ये मुबारक महीना इस्लाम में बताए गए तरीकों के साथ गुजारा है और इस मुकददस महीने के बदले में अल्लाह ने हमें ये ईद का दिन अता फ़र्माया, हमें ज़रूरत है इस बात की, कि हम मुसलमान अपने दीन पर पूरे तरह से अमल करें और दीन का ऐसा नमूना दुनिया वालों के सामने लाएं। कि पूरी दुनिया की  ईद हो जाए। बहुत दिनों से दुनिया हकीकी ईद से महरूम है। न अमन हैं, न भाईचारा, न हमदर्दी है, न तो इंसानियत और न ख़ुदा की याद है न उसकी पहचान है। आज दुनिया को वैश्विक स्तर पर शांति और उन्नति के रूप में वास्तविक ईद की जरूरत है। और वो ईद मुसलमानों की कोशिश से ही आ सकती है। लेकिन अफसोस के मुसलमान खुद अपनी ईद का सही तरीके से शुक्र अदा नहीं कर पाते।इसलिए आप जहां पर भी हैं, यह साबित करें कि आप मुस्लिम क़ौम है। अफसोस सब एक जैसे हो गए। रिश्वत, झूठ,भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी में हम भी मुब्तिला हो गए हालाँकि वास्तविक मुसलमान ऐसा नहीं हो सकता। अगर तुम वास्तविक मुसलमान बनोगे और अल्लाह से डरोगे तो अल्लाह तुम्हें फिर से एक नई शान ओ शौकत अता करेगा। दुनिया में जितने भी त्यौहार हैं। सबका पैगाम सिर्फ और सिर्फ प्यार मोहब्बत और अमन है। ईद उल फितर के दिन मुसलमान एक-दूसरे से गले मिलकर अपने गिले शिकवे दूर करके मुहब्बत का पैगाम देते हैं। ईद का दिन बच्चों के लिए बड़ी खुशी का दिन होता है। वो मेलों में अपने दोस्तों के साथ घूमने निकलते हैं।हमारा देश त्योहारों का देश कहा जाता है। यहां हर धर्म के अपने अपने त्यौहार हैं। पर हर धर्म के लोग इन्हें मिलजुल कर मनाते हैं। हर त्यौहार कुछ खास सन्देश देता है। और संदेश है खुशियां बांटने का मिलजुल कर रहने का और एक अच्छे और एक सुरक्षित समाज को बनाने का, हमें ईद के असल पैगाम को समझना चाहिए। और उसके मुताबिक अपनी ज़िन्दगी गुजारना चाहिए यही ईदुल फित्र का असल पैगाम है।

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