कर्बला की दास्तान दुनिया कों इंसानियत का पैगाम इंसानों को सच्चाई की खातिर प्रेरणा देता है - समाजसेवी जावेद हबीब

★★★★★★★अजय कुमार गुप्ता★★★★★★★★

★ हमीरपुर 9 व 10 मोहर्रम में शांतिपूर्वक संपन्न हुए सभी प्रोग्राम

इमाम हजरत हुसैन की शहादत हुई थी - आसिफ अहमद 

★  नए साल के रूप में मनाते हैं - अरशद खान 

हमीरपुर, नगर में बीते रोज अलाव का कार्यक्रम संपन्न हुआ | वही आज 2 बजे मोहर्रम का जुलूस निर्धारित रास्ते से धूमधाम से निकालते हुए पूरे नगर में भ्रमण करते हुए कर्बला में सुपुर्द खाक किए गए। समाजसेवी जावेद हबीब ने कहा कि कर्बला की दास्तान दुनिया को इंसानियत का एक ऐसा पैग़ाम है। जो हमेशा इंसानों को सच्चाई की खातिर लड़नें की प्रेरणा देती है। आसिफ अहमद नें कहा कि मोहर्रम की 10 तारीख  जिसे अरबी में यौमें आशूरा कहते है कि आज ही के दिन हज़रत ईमाम हुसैन की शहादत हुई थी। मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना है। आमतौर पर लोग नये साल की खुशियां मनाते हैं। लेकिन ये महीना इतिहास के एक ऐसे सच्‍चे किस्‍से को अपने अन्‍दर समेटे हुए है। जिसको दुनिया हमेशा से याद करती आ रही है।


जब तक दुनिया कायम रहेगी तब तक कर्बला की दास्तान सुनी, सुनाई व ब्यान की जाती रहेगी। इंतजामियां कमेटी के नगर अध्यक्ष वली अहमद साबरी नें बताया कि  आज से लगभग 1400 साल पहले इस्‍लामिक दुनिया में ऐसा क्‍या हुआ था। जिसकी वजह से दुनिया के करोड़ो लोग मोहर्रम आते ही उस कहानी को याद करनें लिखने तथा ब्यान करनें में मशगूल हो जाते हैं। ये महीना इस्‍लाम के इतिहास का बहुत महत्वपूर्ण महीना है। समाजसेवी अनवर खान कहते हैं कि जिसमें नवासा-ए-रसूल हज़रत ईमाम हुसैन (रज़ि) की शहादत हुई। अरशद खान ने बताया कि ईमाम हुसैन (रज़ि) इस्लाम धर्म के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल0) के नवासे थे। उन्ही की याद में लोग ताजिया निकालते मातम करते हैं| तथा खूब गरीबों को खिलाते पिलाते हैं। मोहर्रम के जुलूस के समय सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से सदर कोतवाली पुलिस एवं ट्रैफिक पुलिस के पुख्ता इंतजाम रहे।

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