अब समय आ गया है अंग्रेजों के काले कानून को बाय-बाय करने का - वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट अश्वनी उपाध्याय
★ अजय कुमार गुप्ता। ★
समय आ गया है जब न्यायालयों में बैठे मुर्तिगण अपराधियों, भू माफियाओं, बलात्कारियों, भ्रष्टाचारियों और देशद्रोहियों के मन के मुताबिक काम करने वाले संस्थानों पर चोट किया जाए। यह उद्गार हैं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्वनी उपाध्याय के उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश 2023 को जी रहा है और आज हम दुनिया की 5 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में एक हैं और हम अपने देश का विकास रिकॉर्ड स्तर पर कर रहे हैं आज हमारी जीडीपी दुनिया के सभी देशों में सबसे बढ़िया हैं आज जब भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है तब 1860 और 1861 के गुलामी वाले कानून हमारे देश में क्यों लागू हैं हमारे देश में एक हवाई अड्डे को विकसित करने के लिए लगभग 25000 करोड रुपए की आवश्यकता होती है आज तमाम हवाई अड्डे हमारे देश में है परंतु एक हवाई अड्डे का पैसा हम अपने देश के कानून को बेहतर बनाने के लिए नहीं खर्च पाए हैं जो हमारे लिए एक विचारणीय समस्या है।
अंग्रेजों ने जब कानून बनाया था तब उसे अपने स्वार्थ पूर्ति को ध्यान में रखते हुए निर्मित किया गया था परंतु अब तो हमारा देश स्वतंत्र है लेकिन हम आज तक अपने लिए कानून नहीं बना पाए हैं आज भी हम अंग्रेजों के जमाने का पुलिस एक्ट और तमाम सारे एक्ट को उपयोग में ला रहे हैं जो हमारे देश के लिए कतई उचित नहीं है आज निचली अदालतों में ही 30 से 40 साल तक मुकदमे चलते रहते हैं एक पीढ़ी ने यदि मुकदमा किया है तो तीसरी पीढ़ी उस मुकदमे का फैसला ले पाती है परंतु ऐसे न्याय का क्या फायदा जो हमें तीन तीन पीढ़ियां बीत जाने के बाद मिले इसलिए आवश्यकता है न्यायिक प्रक्रिया में आमूल चूल परिवर्तन करने की आज जमीन के और अन्य मामलों के लगभग 10 करोड़ मुकदमे आज भी अदालतों में न्याय की आस में धूल फांक रहे हैं जिसमें निचली अदालतों हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में ही लगभग 50000000 केस पेंडिंग है जबकि जिले के अधिकारियों और चकबंदी अधिकारियों के पास मिलाकर लगभग 50000000 केस विचाराधीन है यदि ऐसा ही चलता रहा तो न्याय व्यवस्था का क्या महत्व है इसका अंदाजा लगा पाना भी कठिन है इसलिए इस न्याय व्यवस्था को तुरंत बदलने की आवश्यकता है और हमें हमारे लिए यानी हमारे देश भारत के लिए एक विकसित न्याय प्रणाली कायम करने की आवश्यकता है नहीं तो न्याय पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा। इस प्रकार से अश्विनी उपाध्याय जो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एवं चर्चित वकिल हैं उन्होंने भारत की न्यायिक व्यवस्था को चुनौती दे डाली है। बस थोड़ा समय निकाल कर उनका वीडियो अवश्य सुन लिजिए।

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